Home
Links
Bible Versions
Contact
About us
Impressum
Site Map


WoL AUDIO
WoL CHILDREN


Bible Treasures
Doctrines of Bible
Key Bible Verses


Afrikaans
عربي
Azərbaycanca
Bahasa Indones.
বাংলা
Български
Cebuano
Deutsch
English
Español
فارسی
Français
հայերեն
한국어
עברית
हिन्दी
Kiswahili
Кыргызча
മലയാളം
नेपाली
日本語
O‘zbek
Peul
Polski
Português
Русский
Srpski/Српски
தமிழ்
తెలుగు
ไทย
Türkçe
Українська
اردو
Uyghur/ئۇيغۇرچه
ייִדיש
Yorùbá
中文


ગુજરાતી
Hausa/هَوُسَا
Latina
Magyar
Norsk

Home -- Hindi -- यूहन्ना

This page in: -- Arabic -- Armenian -- Bengali -- Cebuano -- Chinese -- English -- Farsi -- French -- Hausa -- HINDI -- Indonesian -- Kiswahili -- Kyrgyz -- Malayalam -- Peul -- Portuguese -- Russian -- Serbian -- Spanish -- Tamil -- Telugu -- Turkish -- Urdu -- Uyghur -- Uzbek -- Yiddish

Next Book?

यूहन्ना रचित सुसमाचार - ज्योती अंध्कार में चमकती है।

पवित्र शास्त्र में लिखे हुए यूहन्ना के सुसमाचार पर आधारित पाठ्यक्रम

Jump to Chapter: 01 -- 02 -- 03 -- 04 -- 05 -- 06 -- 07 -- 08 -- 09 -- 10
Jump to Chapter: 11 -- 12 -- 13 -- 14 -- 15 -- 16 -- 17 -- 18 -- 19 -- 20 -- 21

पहला भाग - दिव्य ज्योति चमकती है (यूहन्ना 1:1 - 4:54)
अ - प्रभु के वचन का यीशु में अवतारित होना (यूहन्ना 1:1-18)
1. अवतारित होने से पहले वचन का जौहर और काम (यूहन्ना 1:1-5)
2. बपतिस्मा देने वाला यूहन्ना, मसीह का रास्ता तैयार करता है (यूहन्ना 1:6-13)
3. मसीह के अवतारन में परमेश्वर की परिपूर्णता | (यूहन्ना 1:14-18)
ब - मसीह अपने चेलों को पश्चताप के घेरे से निकाल कर शादी की खुशी में ले जाते हैं (यूहन्ना 1:19 - 2:12)
1. यहुदियों के बड़े न्यायालय का प्रतिनिधी मंडल बपतिस्मा देने वाले यूहन्ना से प्रश्न पूछता है (यूहन्ना 1:19-28)
2. बपतिस्मा देने वाले यूहन्ना की मसीह के बारे में दिल हिलाने वाली गवाही (यूहन्ना 1:29-34)
3. पहले छे चेले (यूहन्ना 1:35-51)

4. काना में एक शादी के दौरान यीशु का पहला आश्चर्यकर्म (यूहन्ना 2:1-12)
क - मसीह का पहली बार यरूशलेम को चले आना (यूहन्ना 2:13-4:54) - सही उपासना क्या है?
1. मन्दिर की सफाई (यूहन्ना 2:13-22)
2. यीशु की निकुदेमुस से बात चीत (यूहन्ना 2:23 - 3:21)
अ) लोग यीशु की तरफ झुकते गये (यूहन्ना 2:23-25)

ब) नये जन्म की जरुरत (यूहन्ना 3:1-13)
क) क्रूस, नये जन्म का साधन (यूहन्ना 3:14-16)
ड) मसीह को अस्वीकार करना, दंड की और ले जाता है (यूहन्ना 3:17-21)
3. दूल्हे यीशु के बारे में बपतिस्मा देने वाले यूहन्ना की गवाही (यूहन्ना 3:22-36)

4. यीशु सामरिया में (यूहन्ना 4: 1-42)
अ) यीशु एक कुलटा को पश्यताप करने की प्रेरणा देते हैं (यूहन्ना 4:1-26)
ब) यीशु अपने चेलों को पकी हुई फसल दिखाते हैं (यूहन्ना 4:27-38)
क) यीशु सामरिया में (यूहन्ना 4:39-42)
5. एक अफसर के पुत्र का स्वस्थ होना (यूहन्ना 4:43-54)

दूसरा भाग - दिव्य ज्योती चमकती है (यूहन्ना 5:1-11:54)
1. बेतहसदा में एक अपाहिज का चंगा होना | (यूहन्ना 5:1-16)
2. परमेश्वर अपने पुत्र के साथ काम करता है (यूहन्ना 5: 17 - 20)
3. मसीह मृत्कों को जीवित करते हैं और संसार का न्याय करते हैं (यूहन्ना 5:20-30)
4. मसीह की दिव्यता क्वे विषय में चार गवाह (यूहन्ना 5:31-40)
5. विश्वास ना करने का कारण (यूहन्ना 5:41-47)

ब - यीशु जीवन की रोटी हैं (यूहन्ना 6:1-71)
1. पाँच हजार पुरुषों को खिलाना (यूहन्ना 6:1-13)
2. यीशु मुकुट धारण के लिये जनप्रदर्शन से पीछे हट जाते हैं (यूहन्ना 6:14-15)
3. संकट के समय यीशु का अपने चेलों के पास पहुंचना (यूहन्ना 6:16-21)
4. यीशु लोगों को चुनने का मौका देते हैं, “स्वीकार करो या ठुकराओ” (यूहन्ना 6:22-59)
5. चेलों का छोड़ कर चले जाना (यूहन्ना 6:59-71)

क - यीशु की यरूशलेम में अन्तिम यात्रा (यूहन्ना 7:1 - 11:54) अन्धकार का ज्योती से अलग होना
1. झोपड़ियों के पर्व के समय पर यीशु का वचन (यूहन्ना 7:1 - 8:59)
अ) यीशु और आपके भाई (यूहन्ना 7:1-13)
ब) लोगों और उच्च न्यायालय के सदस्यों के बीच यीशु के विषय में निराशा जनक विचार (यूहन्ना 7:14-53)

क) शास्त्री, व्यभिचार में पकड़ी गई एक स्त्री को यीशु को परखने के लिये आप के पास लाते हैं (यूहन्ना 8:1-11)
ड) यीशु जगत की ज्योती (यूहन्ना 8:12-29)
5) पाप गुलामी है (यूहन्ना 8:30-36)
6) शैतान हत्यारा और झूटा है (यूहन्ना 8:37-47)
ग) अब्राहम से पहले से यीशु उपस्थित हैं (यूहन्ना 8:48-59)

2. जन्म से अंधे व्यक्ती का स्वस्थ हो जाना (यूहन्ना 9:1-41)
अ) सब्बत के दिन स्वस्थ करना (यूहन्ना 9:1-12)
ब) यहूदियोंने उस चंगे व्यक्ती से प्रश्न पूछे (यूहन्ना 9:13-34)
क) यीशु उस चंगे व्यक्ती को बताते हैं कि आप परमेश्वर के पुत्र हैं (यूहन्ना 9:35-41)

3. यीशु अच्छा चरवाहा (यूहन्ना 10:1-39)
अ) भेड़ें सच्चे चरवाहे की आवाज़ पहचानती हैं (यूहन्ना 10:1-6)
ब) यीशु विश्वसनीय दरवाज़ा हैं (यूहन्ना 10:7-10)
स) यीशु ही अच्छा चरवाहा हैं (यूहन्ना 10:11-21)
डी) पिता और पुत्र की एकता में हमारी सुरक्षा (यूहन्ना 10:22-30)
ई) परमेश्वर का पुत्र, पिता में और पिता उस में (यूहन्ना 10:31-36)

4. लाज़र का जिलाया जाना और उसका परिणाम (यूहन्ना 10:40 - 11:54)
अ) यीशु का यरदन के पार प्रयास (यूहन्ना 10:40 - 11:16)
2) यीशु का मार्था और मरियम से मिलना (यूहन्ना 11:17-33)
3) लाज़र का मृतकों में से जी उठाना (यूहन्ना 11:34-44)
डी) यहूदियों की अदालत यीशु को मृत्यु दंड की सज़ा सुनाती है (यूहन्ना 11:45-54)

तीसरा भाग - प्रेरितों के दल में ज्योती चमकती है (यूहन्ना 11:55 - 17:26)
अ - पवित्र सप्ताह की शुरुआत (यूहन्ना 11:55 - 12:50)
1. यीशु का बैत निय्याह में अभिषेक किया जाना (यूहन्ना 11:55 - 12:8)
2. यीशु यरूशलेम में प्रवेश करते हैं (यूहन्ना 12:9-19)
3. यूनानीयों की यीशु से मिलने की इच्छा (यूहन्ना 12:20-26)
4. हंगामे के बीच में पिता का महिमा पाना (यूहन्ना 12:27-36)
5. लोग न्याय की ओर अपने दिल कठोर कर लेते हैं (यूहन्ना 12:37-50)

ब - प्रभु भोज के बाद होने वाली घटनायें (यूहन्ना 13:1-38)
1. मसीह का अपने चेलों के पांव धोना (यूहन्ना 13:1-17)
2. विश्वासघाती का रहस्य खुल गया और वो चिंतित हुआ (यूहन्ना 13:18-32)
3. कलीसिया के लिये नया आदेश (यूहन्ना 13:33-35)

4. मसीह, पतरस के इनकार की भविष्यवाणी करते हैं (यूहन्ना 13:36-38)
स - ऊपर के कमरे में बिदाई का प्रवचन (यूहन्ना 14:1-31)
1. परमेश्वर मसीह में है | (यूहन्ना 14:1-11)
2. सहायक (पवित्र आत्मा) के द्वारा विश्वासियों के ऊपर पवित्र त्रिय का उतरना (यूहन्ना 14:12-25)
3. मसीह की बिदाई की शांति (यूहन्ना 14:26-31)

द - गैतसमनी के मार्ग पर बिदाई (यूहन्ना 15:1 - 16:33)
1. मसीह में बने रहने से बहुत फल आता है (यूहन्ना 15:1-8)
2. हमारे स्वर्गीय पिता की संगती में बने रहने से हमारा आपस का प्रेम स्पष्ट होता है (यूहन्ना 15:9-17)
3. दुनिया मसीह और आप के चेलों से घ्रणा करती है(यूहन्ना 15:18 - 16:3)

4. पवित्र आत्मा इतिहास की सर्वोच्च महत्वपूर्ण घटनायें घोषित करता है (यूहन्ना 16:4-15)
5. पुनरुत्थान के पर्व के समय पर मसीह चेलों के आनंद की भविष्यवाणी करते हैं (यूहन्ना 16:16-24)
6. हम में पाई जाने वाली मसीह की शांति दुनिया की यातनाओं को पराजीत करती हैं (यूहन्ना 16:25-33)

इ - यीशु की मध्यस्थयी प्रार्थना (यूहन्ना 17:1-26)
1. मध्यस्थी /सिफारशी प्रार्थना का परिचय
2. पिता की महिमा के लिये प्रार्थना (यूहन्ना 17:1-5)
3. यीशु अपने चेलों के लिये प्रार्थना करते हैं (यूहन्ना 17:6-19)
4. यीशु कलीसिया की एकता के लिये प्रार्थना करते हैं (यूहन्ना 17:20-26)

चौथा भाग - ज्योति अन्धकार पर विजय पाती है (यूहन्ना 18:1 - 21:25)
अ - गिरिफ्तारी से गाड़े जाने तक की घटनायें (यूहन्ना 18:1 - 19:42)
1. यीशु की बाग में गिरिफ्तारी (यूहन्ना 18:1-14)
2. यीशु की हन्ना के सामने पेशी और पतरस का तीन बार इनकार करना (यूहन्ना 18:15-21)
3. राष्ट्र के न्यायालय में रोमी गव्हर्नर के सामने यीशु की पेशी (यूहन्ना 18:28 - 19:16)
अ) मसीह के राजसी दावों के विरुद्ध दोषारोपण (यूहन्ना 18:28-38)
ब) यीशु और बरअब्बा में से किसी एक का चुना जाना (यूहन्ना 18:39-40)

क) अपराधी ठहराने वालों के सामने यीशु को कोड़े लगाया जाना (यूहन्ना 19:1-5)
डी) मसीह के दिव्य स्वभाव से पिलातुस आश्चर्यचकित हुआ (यूहन्ना 19:6-12)
5) पिलातुस का यीशु पर अन्यायी दंड का आदेश (यूहन्ना 19:12-16)
4. क्रूस और यीशु की मृत्यु (यूहन्ना 19:16-42)
अ) क्रूस पर लटकाया जाना और कबर के कपड़े (यूहन्ना 19:16ब-22)
ब) कपड़ों का बांटना और चिठ्ठी डालना (यूहन्ना 19:23-24)
क) मसीह का अपनी माँ को सम्बोधित करना (यूहन्ना 19:25-27)
डी) पूरा होना (यूहन्ना 19:28-30)
5) यीशु की पसली का छेदा जाना (यूहन्ना 19:31-37)
6) यीशु का गाड़ा जाना (यूहन्ना 19:38-42)

ब - मसीह का पुनरुत्थान और दर्शन देना (यूहन्ना 20:1 - 21:25)
1. फसह के प्रात: काल की घटनायें (ईस्टर) (यूहन्ना 20:1-10)
अ) मरियम मगदलीनी का कब्र के पास आना (यूहन्ना 20:1-2)
ब) पतरस और यूहन्ना कब्र की ओर दौड पड़े (यूहन्ना 20:3-10)
क) यीशु मरियम मगदलीनी को दिखाई देते हैं (यूहन्ना 20:11-18)
2. यीशु ऊपर के कमरे में चेलों पर प्रगट होते हैं (यूहन्ना 20:19-23)
3. थोमा की उपस्थिति में यीशु का चेलों पर प्रगट होना (यूहन्ना 20:24-29)
4. यूहन्ना के सुसमाचार का अन्त (यूहन्ना 20:30-31)

5. यीशु झील के किनारे पर प्रगट होते हैं (यूहन्ना 21:1-25)
अ) मछलियों का आश्चर्यजनक पकड़ा जाना (यूहन्ना 21:1-14)
ब) पतरस की समूह की सेवा के लिये नियुक्ति (यूहन्ना 21:15-19)
क) यीशु की भविष्यवाणियां (यूहन्ना 21:20-23)
डी) यूहन्ना की गवाही और उन का सुसमाचार (यूहन्ना 21:24-25)

www.Waters-of-Life.net

Page last modified on March 04, 2015, at 04:45 PM | powered by PmWiki (pmwiki-2.2.50)